#1 करोना की वजह से क्या क्या चीज़ें देखने को मिल रही हैं, इस रचना के माध्यम से बताने की कोशिश की है।
‘न’ सोचा था, वो होना देख
न्यूज़ में सिर्फ़ करोना देख
बढ़ती बीमारों की संख्या
दिन दूनी रात चौगुना देख
न्यूज़ में सिर्फ़ करोना देख
बढ़ती बीमारों की संख्या
दिन दूनी रात चौगुना देख
चतुराई से खेला खेल
कोई भाँप सका न ताक
सारा जग रोगी कर डाला
छोटी आँखें चपटी नाक
कोई भाँप सका न ताक
सारा जग रोगी कर डाला
छोटी आँखें चपटी नाक
आज सभी का एक हि रोना
हाय करोना हाय करोना
‘न’ पता दवाई फिर भी बोलें
ये पियो और ये पियो ना
हाय करोना हाय करोना
‘न’ पता दवाई फिर भी बोलें
ये पियो और ये पियो ना
कोई कहे लगाओ ध्यान
घर में रहो बचाओ जान
अैरे गैरे नत्थू खैरे
टीवी पर सब देते ज्ञान
घर में रहो बचाओ जान
अैरे गैरे नत्थू खैरे
टीवी पर सब देते ज्ञान
खैनी, गुटका पर पाबंदी
ठेकों का कहाँ ठिकाना देख
खाना पीना बात दूर की
थूको तो जुर्माना देख
ठेकों का कहाँ ठिकाना देख
खाना पीना बात दूर की
थूको तो जुर्माना देख
मुफ़्त बंट रहा राशन देख
रामदेव का आसन देख
क्रेडिट लेने की होड़ मची है
नेताओं का भाषण देख
रामदेव का आसन देख
क्रेडिट लेने की होड़ मची है
नेताओं का भाषण देख
बहुतेरे घुसे हुए हैं घर में
कहाँ गयी आबादी देख
पूर्ण बंद की ऐसी तैसी
नेता के घर शादी देख
कहाँ गयी आबादी देख
पूर्ण बंद की ऐसी तैसी
नेता के घर शादी देख
गई भाड़ में सोशल दूरी
लोगों की नादानी देख
मरने वाले बढ़ते जायें
ये, दुनिया आनी जानी देख
लोगों की नादानी देख
मरने वाले बढ़ते जायें
ये, दुनिया आनी जानी देख
चप्पे चप्पे पुलिस का पहरा
घर में बैठ नज़ारे देख
दिन में तारे दिख जायेगें
निकल के बाहर प्यारे देख
घर में बैठ नज़ारे देख
दिन में तारे दिख जायेगें
निकल के बाहर प्यारे देख
उट्ठक बैठक पुलिस कराती
गा के गाना भी समझाती
चौबीस घंटे फ़र्ज़ निभाती
हॉस्पिटल से भगे जमाती
गा के गाना भी समझाती
चौबीस घंटे फ़र्ज़ निभाती
हॉस्पिटल से भगे जमाती
बाहर जाने को आतुर कैसे
अपनाते हथकंडा देख
भाँप न पाए चाल पुलिस की
लो, पड़ा पीठ पे डंडा देख
अपनाते हथकंडा देख
भाँप न पाए चाल पुलिस की
लो, पड़ा पीठ पे डंडा देख
जो वीर लगें हैं सेवा में
करें न कोई अंतर देख
और कहीं पर उन्हीं के ऊपर
बरसे ईंटे , पत्थर देख
करें न कोई अंतर देख
और कहीं पर उन्हीं के ऊपर
बरसे ईंटे , पत्थर देख
हुई प्रदूषण मुक्त धरा अब
दो सौ कोस हिमालय देख
निर्मल हो गईं सारी नदियाँ
पोखर, कुंड , जलाशय देख
दो सौ कोस हिमालय देख
निर्मल हो गईं सारी नदियाँ
पोखर, कुंड , जलाशय देख
कुदरत की कैसी माया
बदला रूप लुभावन देख
जीव जंतु सब बाहर आए
बंद घरों में मानव देख
बदला रूप लुभावन देख
जीव जंतु सब बाहर आए
बंद घरों में मानव देख
धन्यवाद, लिखा है
रमेश चन्द्र सिंह
Amit Kumar Singh Supported in Publishing Our blogging site. www.kingcorf.com
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